चौंकाने वाले परिणाम आयेंगे दिल्ली चुनाव में
इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे। हालांकि कई खबरिया चैनल भाजपा और आप में सीधी टक्कर मानते हुए पिछले चुनावों की तरह भाजपा को आप से थोड़ा मजबूत मानने की संभावना जता रहे हैं। वे यह सब ताजा सर्वेक्षणों के आधार पर मान रहे हैं। वैसे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि असली टक्कर भाजपा और आप में है।
हम दिल्ली के दिल की बात कुछ ताजा हालात और बनते—बिगड़ते राजनैतिक समीकरणों को आधार बनाकर तह तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। हाल ही में नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। इस रैली के जरिये भाजपा यह देखना चाहती थी कि भीड़ कितनी जुड़ती है? इसी से यह पता लग जायेगा कि दिल्ली वालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति कितना रुझान है? भीड़ जुटाने के लिए पार्टी ने दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और राजस्थान के सभी सांसदों को अपने—अपने इलाकों से भीड़ लाने को कहा था। इसके बावजूद मोदी को सुनने के लिए आशा से बहुत कम लोग इकट्ठा हुए। दिल्ली की इस रैली में दिल्ली के भी कम ही लोग आये। इसी से भाजपा नेताओं ने अनुमान लगा लिया कि दिल्ली में मोदी लहर नहीं है। अतः अकेले मोदी के दम पर सफल होना संदेह के घेरे में है। हालांकि मोदी ने इस रैली में बोलते हुए केवल अरविन्द केजरीवाल को ही निशाने पर लिया जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रमुख निशाना कांग्रेस थी। इससे यह भी पता चलता है कि भाजपा आज कांग्रेस के बजाय केजरीवाल से भयभीत है।
पहले शाजिया इल्मी और अब पूर्व आइपीएस अधिकारी किरण बेदी को भाजपा में शामिल करना भी आम आदमी पार्टी की ताकत को कमजोर करने का प्रयास है। यह सभी जानते हैं कि ये दोनों महिलायें भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के दौरान अरविन्द केजरीवाल के साथ रही हैं तथा शाजिया ने आप के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था। किरण बेदी का भाजपा में आना शाजिया से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दिल्ली में किरण एक बेहद ईमानदार तथा कुशल पुलिस प्रशासक रही हैं। यदि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के रुप में मैदान में ले आयी तो केजरीवाल को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। वैसे भाजपा केजरीवाल के सामने चुनावी मैदान में उन्हें लायेगी। यह लोहे से लोहा काटने वाली बात रहेगी। भाजपा रैली के बाद समझ गयी कि यहां मोदी फैक्टर के बजाय बेदी दांव चलाया जाये। इसमें कोई दो राय नहीं कि बेदी भाजपा को लाभ दिला सकती हैं।
दूसरी ओर महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने दिल्ली चुनाव में भाग लेने की घोषणा कर दी है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के मुताबिक वे अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इससे यहां सेना को भले ही कोई सफलता न मिले लेकिन भाजपा को भारी झटका लगेगा। यह भी हो सकता है, सेना का यह फैसला भाजपा को सत्ता से वंचित कर दे। इसका सबसे बड़ा लाभ आम आदमी पार्टी को मिलेगा।
उधर मायावती बसपा उम्मीदवारों को अधिकांश सीटों पर उतारना चाहती हैं। ये ऐसे मतदाता होंगे जो भाजपा और आप का समर्थन कर चुके हैं। इससे इन दोनों दलों का नुकसान होगा। इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा। इससे यह भी हो सकता है कि कांग्रेस पिछले चुनाव से कुछ अधिक सीटें जीत ले और भाजपा व आप पहले प्रदर्शन से नीचे आ जायें। यदि ऐसा हो गया तो सरकार बनने में और भी जटिल हालात उत्पन्न हो जायेंगे।
शिवसेना के मैदान में कूदने से परिणामों में भारी फेरबदल होने की संभावना है। महाराष्ट्र में भाजपा ने सरकार बनाते समय सेना को जिस तरह नचाया था, उसका बदला वह दिल्ली में लेना चाहती है।
दूसरी ओर अकाली दल को दरकिनार कर भाजपा पंजाब में बादल का विरोध कर रही है। उससे दिल्ली का सिख समुदाय और पंजाबी बिरादरी भाजपा का मुखर विरोध कर रहे हैं। दिल्ली में पंजाबी मतों की संख्या बहुत है जो कई सीटों के परिणाम बदल सकती है। इनमें से कुछ आप तथा कुछ कांग्रेस की तरफ जायेंगे। भाजपा को इससे बड़ा झटका लग सकता है। इस प्रकार से आये बदलाव का लाभ आप के साथ ही कांग्रेस को भी मिलेगा। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा और आप की सीटें आसपास रहेंगी तथा कांग्रेस थोड़ा ऊपर हो सकती है। यदि आप व भाजपा 25 के आसपास लटक जायें और कांग्रेस 15 तक पहुंच जाये तो आश्चर्य की बात नहीं। यह सरकार बनने में और भी अड़चन पैदा कर सकता है। इन तीनों दलों में कोई भी किसी को समर्थन देना नहीं चाहेगा। यह स्थिति किसी भी तरह सुखद नहीं होगी।
-इंडिया वाइन राजनीति.
हम दिल्ली के दिल की बात कुछ ताजा हालात और बनते—बिगड़ते राजनैतिक समीकरणों को आधार बनाकर तह तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। हाल ही में नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। इस रैली के जरिये भाजपा यह देखना चाहती थी कि भीड़ कितनी जुड़ती है? इसी से यह पता लग जायेगा कि दिल्ली वालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति कितना रुझान है? भीड़ जुटाने के लिए पार्टी ने दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और राजस्थान के सभी सांसदों को अपने—अपने इलाकों से भीड़ लाने को कहा था। इसके बावजूद मोदी को सुनने के लिए आशा से बहुत कम लोग इकट्ठा हुए। दिल्ली की इस रैली में दिल्ली के भी कम ही लोग आये। इसी से भाजपा नेताओं ने अनुमान लगा लिया कि दिल्ली में मोदी लहर नहीं है। अतः अकेले मोदी के दम पर सफल होना संदेह के घेरे में है। हालांकि मोदी ने इस रैली में बोलते हुए केवल अरविन्द केजरीवाल को ही निशाने पर लिया जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रमुख निशाना कांग्रेस थी। इससे यह भी पता चलता है कि भाजपा आज कांग्रेस के बजाय केजरीवाल से भयभीत है।
पहले शाजिया इल्मी और अब पूर्व आइपीएस अधिकारी किरण बेदी को भाजपा में शामिल करना भी आम आदमी पार्टी की ताकत को कमजोर करने का प्रयास है। यह सभी जानते हैं कि ये दोनों महिलायें भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के दौरान अरविन्द केजरीवाल के साथ रही हैं तथा शाजिया ने आप के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था। किरण बेदी का भाजपा में आना शाजिया से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दिल्ली में किरण एक बेहद ईमानदार तथा कुशल पुलिस प्रशासक रही हैं। यदि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के रुप में मैदान में ले आयी तो केजरीवाल को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। वैसे भाजपा केजरीवाल के सामने चुनावी मैदान में उन्हें लायेगी। यह लोहे से लोहा काटने वाली बात रहेगी। भाजपा रैली के बाद समझ गयी कि यहां मोदी फैक्टर के बजाय बेदी दांव चलाया जाये। इसमें कोई दो राय नहीं कि बेदी भाजपा को लाभ दिला सकती हैं।
दूसरी ओर महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने दिल्ली चुनाव में भाग लेने की घोषणा कर दी है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के मुताबिक वे अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इससे यहां सेना को भले ही कोई सफलता न मिले लेकिन भाजपा को भारी झटका लगेगा। यह भी हो सकता है, सेना का यह फैसला भाजपा को सत्ता से वंचित कर दे। इसका सबसे बड़ा लाभ आम आदमी पार्टी को मिलेगा।
उधर मायावती बसपा उम्मीदवारों को अधिकांश सीटों पर उतारना चाहती हैं। ये ऐसे मतदाता होंगे जो भाजपा और आप का समर्थन कर चुके हैं। इससे इन दोनों दलों का नुकसान होगा। इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा। इससे यह भी हो सकता है कि कांग्रेस पिछले चुनाव से कुछ अधिक सीटें जीत ले और भाजपा व आप पहले प्रदर्शन से नीचे आ जायें। यदि ऐसा हो गया तो सरकार बनने में और भी जटिल हालात उत्पन्न हो जायेंगे।
शिवसेना के मैदान में कूदने से परिणामों में भारी फेरबदल होने की संभावना है। महाराष्ट्र में भाजपा ने सरकार बनाते समय सेना को जिस तरह नचाया था, उसका बदला वह दिल्ली में लेना चाहती है।
दूसरी ओर अकाली दल को दरकिनार कर भाजपा पंजाब में बादल का विरोध कर रही है। उससे दिल्ली का सिख समुदाय और पंजाबी बिरादरी भाजपा का मुखर विरोध कर रहे हैं। दिल्ली में पंजाबी मतों की संख्या बहुत है जो कई सीटों के परिणाम बदल सकती है। इनमें से कुछ आप तथा कुछ कांग्रेस की तरफ जायेंगे। भाजपा को इससे बड़ा झटका लग सकता है। इस प्रकार से आये बदलाव का लाभ आप के साथ ही कांग्रेस को भी मिलेगा। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा और आप की सीटें आसपास रहेंगी तथा कांग्रेस थोड़ा ऊपर हो सकती है। यदि आप व भाजपा 25 के आसपास लटक जायें और कांग्रेस 15 तक पहुंच जाये तो आश्चर्य की बात नहीं। यह सरकार बनने में और भी अड़चन पैदा कर सकता है। इन तीनों दलों में कोई भी किसी को समर्थन देना नहीं चाहेगा। यह स्थिति किसी भी तरह सुखद नहीं होगी।
-इंडिया वाइन राजनीति.

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