पर उपदेश कुशल बहुतेरे
जो लोग आजकल दूसरों को चार से लेकर दस बच्चे पैदा करने का आदेश दे रहे हैं, वे अभी तक एक भी बच्चा नहीं पैदा कर सके और भविष्य में भी उनसे एक भी बच्चा मिलने की आशा नहीं। ये लोग बच्चे उत्पन्न करने से लेकर उनका पालन—पोषण करने के दायित्वों से दूर रहे हैं और इसी तरह के पारिवारिक दायित्वों का निवर्हन करने में विफल रहने के कारण वे परिवार नामक अति महत्वपूर्ण संस्था से पलायन कर गये हैं। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी पत्नि को एक भी बच्चा प्रदान नहीं कर सके। उसी सरकार के भगवा ब्रिगेड वाले आज किस मुंह से दूसरे लोगों को दस—दस बच्चे पैदा करने का आदेश दे रहे हैं।
एक ओर ऐसे लोग कहते हैं कि ’यत्र नार्युस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता’, वहीं कहते हैं कि दस—दस बच्चे पैदा करो। जिस नारी की पूजा को देवता भी लालायित रहते हों, उसे आज के कई भारतीय संत बच्चे उत्पन्न कराने को प्रोत्साहित कर क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या हमारी मां—बहने केवल बच्चे उत्पन्न करने के लिए हैं। यह भगवा ब्रिगेड भारतीय विशेषकर हमारे समाज की महिलाओं का अपमान करना चाहती है। जिसके सहारे उनका निजि स्वार्थ सिद्ध हो सके।
वैसे भी पूरा देश भारी आबादी का भार झेल रहा है। सड़क, स्कूल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, अस्पताल भीड़ से भरे हैं। यह सबकुछ बढ़ती आबादी के कारण है। गंदगी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बढ़ती अविराम आबादी ही है। बल्कि एक वाक्य में कहा जाये तो बढ़ती आबादी को रोकना देश की सारी समस्याओं पर काबू पाने का एकमात्र साधन है। अधिक बच्चे पैदा करने का प्रोत्साहन देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। संभव हो सके तो ऐसे लोगों को कोई भी दायित्वपूर्ण पद लेने से वंचित किया जाना चाहिए।
-इंडिया वाइन भारत.

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