दिशाहीनता की शिकार केन्द्र सरकार

Tuesday, January 27, 2015 Harminder Singh Chahal 0 Comments


केन्द्र की भाजपा सरकार के सात माह के कार्यकाल में देश के समझदार लोग उलझ गये होंगे
कि इस सरकार के नेतृत्व में देश की दशा और दिशा की क्या हालत होने वाली है। यह अब दावे के साथ कहा जा सकता है कि यह सरकार पिछली कांग्रेस सरकारों से किसी भी स्तर पर बेहतर नहीं सिद्ध होगी। भाजपा नेतृत्व की सरकार के पास कोई विशेष दृष्टि या कार्यक्रम नहीं है जिसके सहारे वह देश को प्रगति की ओर ले जा सके। केन्द्र सरकार अपने ही किये वायदों और नीतियों के खिलाफ बार—बार रास्ते बदलकर दिशाहीनता की स्थिति में पहुंचती जा रही है। ऐसा लगता है जैसे कि वह एक अप्रशिक्षित नेतृत्व की सरकार है।

चुनाव के दौरान सरदार पटेल की विशाल मूर्ति बनाने के लिए एकत्र किये लोहे का पता नहीं कि वह कहां गया और उसका अब क्या होगा? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पदभार ग्रहण करने के बाद कहीं भी सरदार का नाम तक नहीं लिया। जबकि उन्हें चुनाव के दौरान भारत के इतिहास में पटेल से बड़ा कोई नेता अथवा महापुरुष दिखाई नहीं देता था। अधिकांश लोहा किसानों ने दान दिया था, जो उनके खराब हो चुके कृषि यंत्रों के पुर्जों का अवशेष था। किसान ऐसे अवशेषों को बेचकर जरुरत का सामान ले आते थे लेकिन नरेन्द्र मोदी की उस घोषणा से कि उनकी ट्टसरकार आयी तो किसानों को लागत और मेहनत का डेढ़ गुना दिलाऊंगा’ पर भरोसा कर लोहा भी मोदी को दान कर दिया। साथ ही बढ़चढ़कर भाजपा को वोट भी किया। आज हालत यह है कि किसान कृषि उत्पादों को सस्ते मूल्य पर बेचने को मजबूर है। गन्ना भुगतान और उर्वरकों की तलाश मे बरबाद हो रहा है, परंतु कोई भी सुनने वाला नहीं है। चुनावी सभाओं में चिंघाड़ने वाले मोदी इस तरह के मामलों में बिल्कुल मौन साध गये हैं।

बाहर से आधी कीमत से भी कम पर तेल आयात हो रहा है। बाजार के भरोसे कीमत होने के बावजूद उसकी कीमतें उतनी कम नहीं की जा रहीं, जितनी की जानी चाहिएं। इन पदार्थों पर टैक्स कई गुना बढ़ा कर सरकार मोटा मुनाफा कमाने में जुटी है और कहा जा रहा है, सरकार के पास धन की कमी है। रोडवेज और रेल मार्गों पर किराया ज्यों का त्यों है जबकि उसे कम किया जा सकता है।

विदेशी निवेश और बाहरी कंपनियों के आगमन के नाम पर सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने देश के लोगों को यह कहकर गुमराह किया था कि कांग्रेस देश को फिर से विदेशियों का गुलाम बनाना चाहती है। देश को गुलामी से बचाने के लिए लोगों से भाजपा ने वोट मांगा, उसे मिला और वह बहुमत के साथ सत्ता में आयी। कितनी मजेदार बात है कि सत्ता मिलते ही भाजपानीत केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री बाहरी कंपनियों को विदेशों में जा—जाकर भारत आने का निमंत्रण देते फिर रहे हैं, साथ ही उनके लिए सरल कानून बनाने का प्रयास हो रहा है। कई क्षेत्रों में ऐसी कंपनियों के प्रत्यक्ष निवेश को हरी झंडी दे दी है।

आरटीआई जैसे कानून को कुन्द करने का गुपचुप काम हो रहा है। उसके शीर्ष पदों से रिटायर हो चुके कई बड़े अधिकारियों के रिक्त पदों को खाली रहने दिया जा रहा है। जिससे यह विभाग निष्क्रियता की हालत में है। सरकारी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता का सबसे सशक्त यह हथियार जनता से छीना जा रहा है जिससे भ्रष्ट कारनामों की पोल न खुल सके।

चाटुकार मीडिया वर्ग को सरकारी धन की बरबादी कर अनापशनाप विज्ञापनों की झड़ी लगा दी गयी है। सरकार की झूठी और बेवजह की उपलब्धियों का बखान चल रहा है। परंतु जनता धीरे—धीरे समझ रही है।

जीडीपी गिर रही है। कृषि प्रधान देश का किसान और मजदूर सबसे बुरे हाल में जा रहा है। उघोग और बाजार 75 प्रतिशत उस आबादी के सहारे है जो गांवों में बसती है। उसकी जेब खाली होने से देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो जायेगी। केन्द्र सरकार इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही। इसी से केन्द्र सरकार की अक्षमता का पता चलता है। सरकार दिशाहीनता की शिकार है जो देश के लिए खतरनाक और दुर्भाग्यशाली है।

-इंडिया वाइन राजनीति.

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